• Saturday, 11 April 2026
जीएनएम की प्रशिक्षु छात्राओं को सदर अस्पताल में मिलने लगा प्रायोगिक प्रशिक्षण।

जीएनएम की प्रशिक्षु छात्राओं को सदर अस्पताल में मिलने लगा प्रायोगिक प्रशिक्षण।

Vikas

शेखपुरा।

राज्य सरकार द्वारा जिले में नवस्थापित जीएनएम ट्रेनिग स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को अब स्थानीय सदर अस्पताल में नियमित रूप से उन्हें प्रायोगिक प्रशिक्षण देने का कार्य निर्बाध रूप से शुरू कर दिया गया है । इस स्कूल की स्थापना के बाद तीन वर्षीय कोर्स की पढाई यहाँ शुरूआती दौर रहने के कारण कुछ माह विलम्ब से हुई । शैक्षणिक सत्र के प्रथम वर्ष 2018 – 2019 की पढ़ाई अप्रैल माह से शुरू होने के बजाय जुलाई माह से शुरू हुई । स्कूल के प्रथम बैच में राज्य के विभिन्न कोने से प्रवेश परीक्षा उतीर्ण कर आई कुल 60 छात्राओं का यहाँ नामांकन हुआ । जिसमे किताबी शिक्षा के साथ – साथ उन्हें प्रायोगिक शिक्षा दिया जाना शुरू कर दिया गया । तीस छात्राओं का एक अलग से बैच बनाकर सदर अस्पताल में इन छात्राओं को मरीजों का उपचार करने ,दवाओं के उपयोग तथा मरीजों व उनके अभिभावकों के साथ व्यवहार की सीख छात्राओं को दी जा रही है । तीन वर्षीय कोर्स के प्रथम वर्ष में कमसे कम तीन माह का प्रायोगिक प्रशिक्षण पाना नितांत जरूरी बताया गया है ।

बृहस्पतिवार के दिन इस स्कूल की तीस की संख्या में छात्राएं सदर अस्पताल में प्रायोगिक प्रशिक्षण लेने पहुंची । प्रशिक्षण लेने पहुंची छात्राओं में जहानाबाद की रीना भारती ,बेगुसराय की रूपम कुमारी ,गया की पिंकी ,दरभंगा की स्वाति कुमारी ,नालंदा की प्रीति कुमारी एवं समस्तीपुर की रौशनी कुमारी सहित अन्य को अस्पताल के वरीय चिकित्सक डॉ कृष्ण मुरारी प्रसाद सिंह , डॉ विनय कुमार तथा डॉ शैलेन्द्र कुमार द्वारा ओपीडी के अलावा इमरजेंसी कक्ष में रोज की भांति प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया , डॉ के एमपी सिंह ने कहा कि चिकित्सीय क्षेत्र में प्रायोगिक शिक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्व है । इस प्रायोगिक शिक्षा के बिना सही मायने में चिकित्सा सेवा अधूरा रह जाता है । उन्होंने बताया कि रोग का आदमी में मुख्यतः रोग छह- सात प्रकार के ही होते है ।

जिसमे बैक्टरियल , प्रोटोजोअल , वंशागत ,वाईरल , ट्रोमैटिकल , फंगल एवं अज्ञात व असाध्य रोग शामिल है । उन्होंने छात्राओं को इन रोंगों के उपचार की विधि व सटीक दवाओं की जानकारी दी | इस ट्रेनिग स्कूल में पढने वाली छात्राएं इस अस्पताल में मिलने वाली प्रायोगिक शिक्षा से काफी संतुष्ट नजर आ रही थी |

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