शेखपुरा : बेटी के जन्म पर मना उत्सव, ढोल बजे के साथ ले गए घर
शेखपुरा : बेटी के जन्म पर मना उत्सव, ढोल बजे के साथ ले गए घर
शेखपुरा।
आज भी समाज के कई हिस्सों में बेटी के जन्म पर खुशी से ज्यादा चिंता का माहौल देखा जाता है। दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों और पुरानी सोच के कारण कई परिवार बेटियों के जन्म को बोझ मान बैठते हैं। यही वजह है कि भारत सहित बिहार में बेटियों की संख्या अपेक्षाकृत कम बनी हुई है। शेखपुरा जिले में भी प्रति 1000 पुरुषों पर केवल 912 बेटियां दर्ज हैं। कन्या भ्रूण हत्या आम बात है। कई अवैध क्लिनिक ने बेटी की जानकारी पर गर्भपात कराया जाता है।

ऐसे दौर में शेखपुरा शहर से सामने आई एक सकारात्मक तस्वीर समाज को नई दिशा देने वाली है।
शहर के लालबाग मोहल्ला निवासी कन्हैया कुमार और उनकी पत्नी श्रुति कुमारी ने अपनी पहली संतान के रूप में बेटी के जन्म पर ऐसा उत्सव मनाया, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। सदर अस्पताल में सोमवार को सामान्य प्रसव से बच्ची के जन्म के बाद परिवार ने नवजात को ‘लक्ष्मी’ मानते हुए गाजे-बाजे, गुब्बारों से सजी गाड़ी और वाहनों के काफिले के साथ घर पहुंचाया। ‘बेटी हुई है’ लिखे बैनर के जरिए पूरे शहर को यह संदेश दिया गया कि बेटियां बोझ नहीं, सम्मान और सौभाग्य हैं।
परिवार ने अस्पताल से लेकर मोहल्ले तक मिठाइयां बांटकर खुशी साझा की। बच्ची की मां श्रुति कुमारी ने कहा कि बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं है, फर्क सिर्फ समाज की सोच में है। वहीं पिता कन्हैया कुमार ने कहा कि बेटी के जन्म को उत्सव बनाकर उन्होंने समाज से भेदभाव खत्म करने की कोशिश की है।
बेटियों की घटती संख्या और सामाजिक भेदभाव के बीच यह पहल न केवल महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी, बल्कि यह संदेश भी दे गई कि जब समाज बेटियों के जन्म पर गर्व करना सीखेगा, तभी वास्तविक बदलाव संभव होगा।
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