गांव की गलियों में बिखरी पड़ी हैं पौराणिक धरोहरें, पर्यटन की अपार संभावनाएं
गांव की गलियों में बिखरी पड़ी हैं पौराणिक धरोहरें, पर्यटन की अपार संभावनाएं
शेखपुरा, संवाददाता। शेखपुरा जिले के चांदी गांव और चांदी वृंदावन पहाड़ पर बिखरी पौराणिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों ने एक बार फिर प्रशासन और इतिहास प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया है। पांडुलिपियों और प्राचीन अवशेषों की खोज के सिलसिले में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सुजीत कुमार सुमन ने मंगलवार को चांदी वृंदावन पहाड़ तथा चांदी गांव का विस्तृत निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने पहाड़ पर स्थित प्राचीन स्थलों का बारीकी से अवलोकन किया। ग्रामीणों के आग्रह पर गांव की गलियों और विभिन्न स्थानों पर वर्षों से उपेक्षित अवस्था में पड़ी प्राचीन प्रतिमाओं एवं शिल्प अवशेषों का भी निरीक्षण किया। कई मूर्तियां कलात्मक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतीत हुईं, जिन्हें देखकर क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुमान लगाया जा सकता है।
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने कहा कि चांदी गांव और वृंदावन पहाड़ शेखपुरा जिले के गौरवशाली इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। इनकी वैज्ञानिक जांच, पुरातात्विक सर्वेक्षण और आवश्यक खुदाई कराकर संरक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने कुछ प्रतिमाओं के नमूने भी संकलित किए, जिन्हें जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कर पुरातत्व विभाग से विस्तृत जांच कराने का आग्रह किया जाएगा।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मगध सम्राट जरासंध के सेनापति चांदूक का निवास इसी पहाड़ पर था। उनके द्वारा सिद्धवानी मंदिर की स्थापना किए जाने की भी लोककथा प्रचलित है। कहा जाता है कि महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांचों पांडव यहां पहुंचे थे और पूजा-अर्चना कर विजय का आशीर्वाद प्राप्त किया था। सेनापति चांदूक के नाम पर ही गांव का नाम चांदी पड़ा।
सामाजिक कार्यकर्ता पिंटू चंद्रवंशी लंबे समय से इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग उठाते रहे हैं। प्रत्येक वर्ष भाद्र पूर्णिमा पर यहां लगने वाला विशाल शबरी मेला हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पुरातात्विक अनुसंधान और संरक्षण का कार्य शुरू हो, तो चांदी वृंदावन पहाड़ बिहार के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है।
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