कुर्मी चेतना रैली के सूत्रधार सतीश कुमार का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर, मुखिया से शुरु किया राजनीतिक यात्रा
कुर्मी चेतना रैली के सूत्रधार सतीश कुमार का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर, मुखिया से शुरु किया राजनीतिक यात्रा
शेखपुरा/नालंदा
बिहार की राजनीति में कुर्मी समाज की अलग पहचान बनाने वाले वरिष्ठ नेता और अस्थावां व सूर्यगढ़ा के पूर्व विधायक सतीश कुमार का मंगलवार सुबह निधन हो गया। ब्रेन हैमरेज के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई थी, जिसके बाद उन्हें पटना के फोर्ड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान सुबह करीब पौने सात बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैल ते ही नालंदा, शेखपुरा और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई।
सतीश कुमार मूल रूप से शेखपुरा जिले के बरबीघा प्रखंड के सर्वा गांव के निवासी थे। उनका जन्म वर्ष 1948 में हुआ था। वे लंबे समय तक सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। बिहार की राजनीति में उनकी पहचान खास तौर पर वर्ष 1994 में पटना के गांधी मैदान में आयोजित ऐतिहासिक कुर्मी क्षेत्र चेतना महारैली के कारण बनी। 12 फरवरी 1994 को आयोजित इस विशाल रैली के माध्यम से उन्होंने उस समय की राजनीति में पिछड़े वर्गों के भीतर एक नई राजनीतिक रेखा खींचने का प्रयास किया। माना जाता है कि इसी आंदोलन ने आगे चलकर नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने की राजनीतिक पृष्ठभूमि तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सतीश कुमार अपने पंचायत से मुखिया भी रहे। वहीं शेखपुरा के दिग्गज नेता राजो सिंह के विरुद्ध चुनाव भी लड़ा।
सतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से की। वर्ष 1990 में सीपीआई के टिकट पर लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद वर्ष 1995 में नालंदा जिले के अस्थावां से निर्दलीय विधायक बने और वर्ष 2001 में समता पार्टी से भी विधायक रहे। उन्होंने वर्ष 2009 में नालंदा लोकसभा सीट से लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा, जिसमें वे दूसरे स्थान पर रहे।
अपने लंबे राजनीतिक जीवन में सतीश कुमार कई दलों से जुड़े रहे और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने बरबीघा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें करीब दो हजार मत प्राप्त हुए थे।
सतीश कुमार अपने पीछे एक पुत्र और दो पुत्रियों का परिवार छोड़ गए हैं। उनके पुत्र मुकेश कुमार वर्ष 2005 में चुनाव लड़ चुके हैं, जबकि एक बेटी स्मृति सिन्हा अमेरिका में रहती हैं और दूसरी बेटी शबनम लता ने वर्ष 2025 में अस्थावां से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था।
उनके निधन पर क्षेत्र के कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
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