• Sunday, 08 February 2026
बजट 2026-27: आम आदमी को क्या मिला, क्या चिंता बढ़ी

बजट 2026-27: आम आदमी को क्या मिला, क्या चिंता बढ़ी

Vikas

बजट 2026-27: आम आदमी को क्या मिला, क्या चिंता बढ़ी

 

नई दिल्ली 

 

केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे और मध्यम वर्ग को राहत देने पर जोर दिया है। बजट में पूंजीगत खर्च को रिकॉर्ड ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ाया गया है। इससे सड़कों, रेल परियोजनाओं, शहरी विकास और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और MSME को मजबूती देने के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया गया है। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के जरिए हाई-टेक उद्योग और नवाचार को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।

आम लोगों के लिए टैक्स में कुछ राहत दी गई है। गैर-कर योग्य आय सीमा में छूट और नए इनकम टैक्स बिल से टैक्स भरने की प्रक्रिया आसान होने की बात कही गई है। विदेश यात्रा, शिक्षा और इलाज से जुड़ी रेमिटेंस पर LRS के तहत TCS में भी कुछ राहत दी गई है।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी फोकस किया गया है। किसानों के लिए कर्ज की सुविधा बढ़ाने और कृषि उत्पादकता सुधारने की योजनाएं लाई गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर व कनेक्टिविटी पर निवेश बढ़ाया गया है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश बढ़ाने, मेडिकल सीटों में इजाफा और स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया गया है। गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को ई-श्रम पोर्टल के जरिए सामाजिक सुरक्षा देने की बात कही गई है।

 

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हालांकि बजट को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। राजस्व जुटाने में दिक्कतें बनी हुई हैं और फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य 4.4 प्रतिशत रखा गया है, जिससे कर्ज और ब्याज दरों को लेकर दबाव रह सकता है। शेयर बाजार में F&O पर STT बढ़ने से छोटे निवेशकों की लागत बढ़ने की आशंका है। निजी निवेश की रफ्तार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च अभी भी सीमित माना जा रहा है और रोजगार सृजन को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।

बजट के बाद कुछ वस्तुओं के सस्ते और महंगे होने की संभावना जताई जा रही है। मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स, कुछ दवाइयां, इलेक्ट्रिक वाहन और घरेलू उत्पाद सस्ते हो सकते हैं। वहीं शराब, तंबाकू, लक्ज़री आयातित सामान, विदेशी कारें और कॉस्मेटिक्स के दाम बढ़ सकते हैं।

कुल मिलाकर बजट में विकास और सुधारों पर जोर है, लेकिन महंगाई, रोजगार और राजकोषीय संतुलन को लेकर चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

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