• Sunday, 27 November 2022
प्रभात शंकर को मिला तिलकामांझी राष्ट्रीय सम्मान। मलूटी मंदिर को दिलाई है पहचान

प्रभात शंकर को मिला तिलकामांझी राष्ट्रीय सम्मान। मलूटी मंदिर को दिलाई है पहचान

शेखपुरा। बरबीघा

बरबीघा के कुटौत निवासी,झारखंड सूचना एवंं जनसंपर्क विभाग के पदाधिकारी प्रभात शंकर को 26 अगस्त को भागलपुर में तिलकामांझी राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया। तिलका मांझी राष्ट्रीय सम्मान समारोह 2018 का आयोजन मल्टी परपस हॉल, ओल्ड पीजी कैंपस, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर में तिलकामांझी भागलपुर विश्विद्यालय के कुलपति आचार्य नलिनीकान्त झा की अध्यक्षता में हुआ था।

बिहार पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय

थे मुख्य अतिथि

जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर बिहार पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय एवं विशिष्ट अतिथि के तौर पर भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक आशीष भारती, वरिष्ठ पत्रकार मुकुटधारी अग्रवाल, बिहार पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ रतन मंडल, वरिष्ट गांधीवादी लेखक डॉ श्रीभगवान सिंह व वरिष्ट पत्रकार ब्रजकिशोर मिश्र ने शिरकत की थी।

महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के परिप्रेक्ष्य में आयोजित सम्मान समारोह में साहिबगंज जनसंपर्क पदाधिकारी प्रभात शंकर को दुमका के मलूटी मंदिर के संरक्षण, संवर्द्धन एवं अन्तर्राष्ट्रीय फलक पर मलूटी की पहचान को स्थापित करने के प्रयासों की ख़ूब सराहना की गयी।

इस महत्ती कार्य के लिए ही उन्हें स्वाधीनता सेनानी शुभकरण चूड़ीवाला की स्मृति में राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया।

बरबीघा के है निवासी

बिहार के बरबीघा, मुंगेर वर्तमान-शेखपुरा में जन्मे प्रभात शंकर की शिक्षा तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से हुई है। प्रभात शंकर स्नातकोत्तर, शोधार्थी जेआरएफ(सीएसआईआर) टीएमबीयु हैं। उनके शोध का विषय पूर्वी बिहार में वर्षा और फसल विविधीकरण की विविधता है। प्रभात शंकर ने प्रारंभ में केन्द्रीय विद्यालय, हल्दिया (पश्चिम बंगाल) में शिक्षण का काम किया। स्वतंत्र लेखन में भी सक्रिय रहे हैं। सम्प्रति झारखंड सूचना सेवा में जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी साहेबगंज/पाकुड़ के रूप में कार्यरत हैं।

इनके लिए सरकारी नौकरी वस्तुतः एक जन सेवा का माध्यम है। सरकार के जनसम्पर्क कार्यो के दौरान लोगों के व्यवहार परिवर्तन, चेतन स्तर को ऊँचा उठाने एवं बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करने में उन्हें कोई अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होती है। लोगों के जुड़ाव से उन्हें सत्य के करीब आने का मौका मिलता है।

इससे मिली आत्मसंतुष्टि का भाव उनके जीवन की सार्थकता के लिए काफी है। जन सम्पर्क पदाधिकारी के तौर पर उन्होंने दुमका में पदस्थापित रहकर मलूटी के टेराकोटा मंदिरों के संरक्षण, संवर्द्धन हेतु स्थानीय लोगों से सहयोग प्राप्त कर अन्तर्राष्ट्रीय पटल तक पहुँचाने का सफल प्रयास किया। जिसके फलस्वरूप 2015 में नई दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड में झारखंड की झांकी में मलूटी के मंदिरों का प्रदर्शन हुआ।

साथ ही पहली बार बिहार/झारखंड की किसी झांकी को द्वितीय पुरस्कार मिला। प्रभात शंकर आज भी संताल और पहाड़िया संस्कृति के संरक्षण, संवर्द्धन हेतु स्थानीय लोगों के जनजागरण के लिए प्रयासरत हैं।

शहीद सिदो-कान्हू दिवस को बनाते है यादगार

प्रभात शंकर साहिबगंज में प्रत्येक वर्ष अमर शहीद सिदो-कान्हू के शहादत दिवस कार्यक्रम हूल दिवस समारोह को अविस्मरणीय बनाने का प्रयास लगातार कर रहे हैं। साथ ही खेलों की भूमि साहिबगंज को फुटबॉल के क्षेत्र में पुनर्स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। साहिबगंज में जनसंपर्क पदाधिकारी के अलावे प्रभारी खेल पदाधिकारी के तौर पर प्रभात शंकर
फुटबॉल के खेल को सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक के रूप में स्थापित करने में प्रयासरत है।

राज्यपाल ने भी किया है सम्मानित

हूल दिवस पर भी उन्हें झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने उल्लेखनीय सेवा के लिए सम्मानित किया है। इससे पहले भी प्रभात शंकर को प्रशासनिक व सामाजिक कार्यों के लिए अनेक सम्मान मिल चुका है। प्रभात शंकर की इस उपलब्धि से साहिबगंज, पाकुड़ व दुमका के पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों में हर्ष व्याप्त है। वहीं शेखपुरा जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी सतेंद्र प्रसाद ने भी बधाई दी है।

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