
अधिक कीमत लेकर बेचे जा रहे सुधा सहित अन्य कंपनियों के दूध, नियंत्रण नहीं कर पा रहे अधिकारी

शेखपुरा
दूध एक ऐसी वस्तु है जिसकी पूर्ति माँग मूल्य में बदलाव आता है तो आम लोगों के जिंदगी को प्रभावित करता है। दूध अमृत हैं जिसकी जरूरत बच्चे जवान बूढ़े सभी लोगो को है। इसके मूल्य में स्थिरता की बहुत जरूरत होती है वरना ये आमलोगों के जन जीवन पे प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसीलिये सरकार भी इसके मूल्य पे नजर रखती है। तथा सही मात्रा और समय से आपूर्ति हो इसका भी ख्याल रखती है।
ऊंचे कीमत पर बिक रहे दूध
शेखपुरा जिला मुख्यालय से लेकर बरबीघा नगर परिषद सहित अन्य जगहों पर मिलने वाले दूध ₹2 से ₹4 अधिक कीमत लेकर बेचे जा रहे हैं। ग्राहकों के द्वारा पूछे जाने पर इसमें दुकानदार के द्वारा रेफ्रिजरेटर का खर्च कह कर बात को घुमा दिया जाता है । जबकि ऊंची कीमत पर सामान को बेचने पर नियंत्रण रखने वाले अधिकारी इस तरफ कभी कोई ध्यान नहीं देते इसकी वजह से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की जेब ढीली हो रही है।
अगर दूध के मूल्य में एक रुपया भी इजाफा हुआ तो ये आम जनमानस पे बहुत बड़ा प्रभाव छोड़ता है।
शेखपुरा जिला में दूध के व्यवसाय कर रहे लोगों से बात करने पे ये पता चला कि दूध के MRP से एक रुपया या दो रुपये बढ़ा कर ग्राहकों से पैसा लेना ये आम बात है। लेकिन शायद लोगों को मालूम नही की इसका अर्थव्यवस्था और आम जीवन जीवन पे प्रतिकूल प्रभाव छोड़ता है।
दूध के दुकानदारों से जब ये सवाल पूछा गया कि क्यों आप MRP से ज्यादा दाम में दूध बेचते हैं तो उनका कहना है कि हमें मार्जिन के रूप में एक रुपया मिलता है जो कि नाकाफी है। हमें रेफ्रिजरेटर में रखना पड़ता है, जल्दी खराब होने की वस्तु है जिससे हमें नुकसान होने की संभावना ज्यादा होती है।
इस विषय पे सरकार को भी संज्ञान लेना चाहिये और क्यों ना MRP को बढ़ा के दुकानदार के मार्जिन को बढ़ाना चाहिये। एक उदाहरण के द्वारा स्पष्ट करना चाहूंगा कि कैसे ये अर्थव्यवस्था पे चोट कर रहा है। मान लीजिये एक शहर में 10 लाख लीटर दूध की आपूर्ति हो रही है, अगर 2 रुपये भी दुकानदार बढ़ा के ले रहा है तो बाजार में 20 लाख रुपया रोजाना काला धन आ रहा है। सरकार काला धन पे अंकुश लगाने के प्रति प्रयाशरत है लेकिन यहाँ काला धन का बेतहासा वृद्धि हो रही है। आम जनता अगर 2 रुपये ज्यादा में वस्तु खरीद रही है तो एक लीटर दूध में उसे 60 रुपया ज्यादा देना पड़ रहा है।

अतः सरकार को इसपे गंभीरता से सोचना चाहिये और ऐसा उपाय करना चाहिये कि भविष्य में काला धन का उपज न हो और दूध उपभोक्ता को भी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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