
सुप्रीम कोर्ट ने कुत्ते को भी दिया गांव और मोहल्ले के मूल निवासी होने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने कुत्ते को भी दिया गांव और मोहल्ले के मूल निवासी होने का अधिकार
न्यूज़ डेस्क
इन दिनों आवारा कुत्ते को मोहल्ले और गांव से भगाने का अभियान चलाया जा रहा है। उसे खाना खिलाने वालों से दुर्व्यवहार किया जा रहा है। मारपीट हो रही है । हालांकि कई जगहों पर आवारा कुत्ते के द्वारा लोगों पर हमले किए जाने और जान लेने की खबरें भी वायरल हुई है । इसी बीच पशु प्रेमियों के द्वारा आवारा कुत्ते के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में संघर्ष किया गया। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के द्वारा आदेश जारी करते हुए कुत्तों को गांव और मोहल्ले का मूल निवासी होने का अधिकार दिया गया है। इस खबर को सोशल मीडिया पर खूब वायरल किया जा रहा है और पशु प्रेमी के लिए यह अच्छी खबर हो रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन को लेकर केंद्र सरकार के द्वारा भी मंगलवार को पहल की गई । पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कुत्ता के जन्म नियंत्रण नियमावली को मंगलवार को अधिसूचित किया गया।
पशुओं पर अत्याचार रोकने के लिए यह पहल की गई है। सरकार के इसी अधिनियम के तहत पशु , कुत्ता जन्म नियंत्रण नियमावली 2023 को अधिसूचित किया गया है।

नए नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि कुत्ता को मोहल्ला, गांव में रखने , रहने, उसे आश्रय देने, उसे खाना देने को लेकर कोई भी मना नहीं कर सकता । कुत्ते मोहल्ले अथवा गांव में जहां चाहे रह सकते हैं। किसी भी क्षेत्र से कुत्तों को भगाए नहीं जाएगा। हटाया नहीं जाएगा।
इस संबंध में यह भी उल्लेख किया गया है कि आवारा कुत्ते के द्वारा मनुष्यों से होने वाले संघर्ष अथवा उसके काटने को लेकर भी उसे भगाया अथवा हटाया नहीं जा सकता है। उसके संघर्ष से निबटने के लिए दूसरे उपाय करने होंगे। हालांकि इसमें पशुओं के जन्म नियंत्रण को लेकर भी नगरपालिका को अनुमति दिया गया है। साथ ही साथ रेबीज रोधी अभियान संयुक्त रूप से चलाने के लिए कहा गया है जिसमें जन्म नियंत्रण अभियान और रेबीज रोधी अभियान चलाया जाएगा।




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