
जन्मभूमि में उपेक्षित बिहार केसरी की प्रतिमा: बदहाल स्थिति पर उठे सवाल

जन्मभूमि में उपेक्षित बिहार केसरी की प्रतिमा: बदहाल स्थिति पर उठे सवाल
शेखपुरा से विशेष संवाददाता
शेखपुरा जिले में स्वतंत्रता सेनानी और बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (बिहार केसरी) की स्मृतियों और प्रतिमा की उपेक्षा ने स्थानीय लोगों और समाजसेवियों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। उनकी जन्मभूमि पर स्थापित प्रतिमा और उनसे जुड़े धरोहर बदहाल स्थिति में हैं।
कचरा स्थल में तब्दील प्रतिमा स्थल
जिला मुख्यालय के गिरीहिंडा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बिहार केसरी की प्रतिमा स्थापित है। लेकिन आज यह स्थान कचरा स्थल में तब्दील हो चुका है। अस्पताल प्रशासन और नगर परिषद, दोनों ने प्रतिमा स्थल की साफ-सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नगर परिषद और अस्पताल प्रशासन को कई बार आवेदन देकर प्रतिमा स्थल की देखभाल की मांग की है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
पुण्यतिथि पर जागेगी याद, लेकिन उपेक्षा का दर्द बरकरार

30 जनवरी को डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। लेकिन यह विडंबना है कि उनकी जन्मभूमि पर उनकी प्रतिमा और विरासत की यह स्थिति उनकी स्मृतियों के साथ अन्याय जैसा प्रतीत होता है। उल्लेखनीय है कि 1973 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री लहटन चौधरी ने इस प्रतिमा का अनावरण किया था।
आरएसएस से जुड़े अभय कुमार ने कहा, "बिहार केसरी की उपेक्षा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बिहार के विकास और नव निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें 'बिहार का विश्वकर्मा' कहा जाता है।" वहीं, उनके गांव बरबीघा के निवासी अविनाश कुमार काजू ने कहा, "यह बेहद दुखद है कि जिस जिले में उनका जन्म हुआ, वहां उनकी स्मृतियों की ऐसी स्थिति हो गई है।"
बिहार केसरी की जन्मभूमि की यह स्थिति न केवल स्थानीय प्रशासन की उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि यह हमारी ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति उपेक्षा का भी प्रतीक है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब इस ओर ध्यान देता है और उनकी स्मृतियों को संजोने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




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