• Wednesday, 05 October 2022
क्या मुखिया जी गटक गए हैं गांव में सरकारी ट्यूबवेल को चालू करने का पैसा..?

क्या मुखिया जी गटक गए हैं गांव में सरकारी ट्यूबवेल को चालू करने का पैसा..?

क्या मुखिया जी गटक गए हैं गांव में सरकारी ट्यूबवेल को चालू करने का पैसा..?

News Desk

बिहार सरकार के द्वारा गांव में सिंचाई की प्रबंध को लेकर सरकारी ट्यूबवेल को चालू कराने की जिम्मेवारी गांव पंचायत के मुखिया को दे दी । गांव पंचायत के मुखिया को यह जिम्मेवारी 2018 में ही दे दी गई और इसके लिए चालू कराने के लिए राशि भी दिया गया। हर जिले में इसके लिए राशि दी गई और मुखिया को नलकूप के चालू कराने, रखरखाव, संचालन सभी की जिम्मेदारी दी गई। पटवन के बाद किसानों से राशि वसूलने के लिए कहा गया । ज्यादातर जगहों पर मुखिया ने इस पर संज्ञान नहीं लिया और कुछ जगहों पर तो पैसे का बंदरबांट भी कर लिया गया।


2021 में शेखपुरा जिले में 50 नलकूप के रखरखाव मरम्मत, चालू कराने के लिए 1 करोड़ 70 हजार राशि दी गई । राशि को खर्च भी कर लिया गया और उपयोगिता प्रमाण पत्र भी नहीं दिया गया। ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। खेत सूखे हुए हैं और किसान परेशान हैं परंतु ट्यूबेल चालू नहीं हुआ।

इस संबंध में जिलाधिकारी सावन कुमार ने बताया कि सरकारी ट्यूबवेल को चालू कराने के लिए लघु सिंचाई विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है। गड़बड़ी करने के आरोप में 10 पंचायत के मुखिया और पंचायत सचिव पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आगे भी इस तरह की गड़बड़ी आएगी तो कठोर कार्रवाई होगी । सूखे के खतरे को देखते हुए सरकारी ट्यूबवेल को चालू कराने की प्राथमिकता है। इसको लेकर लगातार समीक्षा बैठकें हो रही हैं और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।


शेखपुरा में 177 में 141 नलकूप बंद

सूखे से निपटने के लिए किसानों का बड़ा सहारा टेबल होता है परंतु जिले में 177 ट्यूबवेल में 141 ट्यूबेल बंद है। फाइलों पर 36 सरकारी ट्यूबवेल के चालू होने की बात कही गई है परंतु इसमें भी परेशानी है। 141 में से 70 नलकूप टेक्निकल फॉल्ट से बंद है। 25 में बिजली का कनेक्शन नहीं है या ट्रांसफार्मर जला हुआ है। 20 ट्यूबवेल में गंभीर खराबी आ गई है और 25 ट्यूबवेल को मृत घोषित कर दिया गया है। 1982 से ही कई ट्यूबवेल बंद पड़े हुए हैं।

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