• Monday, 01 September 2025
सात समुद्र पार से बिहार के इस गांव में हर साल आते है साइबेरिया पंछी

सात समुद्र पार से बिहार के इस गांव में हर साल आते है साइबेरिया पंछी

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सात समुद्र पार से बिहार के इस गांव में हर साल आते है साइबेरिया पंछी

 

बरबीघा, शेखपुरा

 

पांच हजार किलोमीटर दूर सोवियत संघ का कभी हिस्सा रहे साइबेरिया से पंछी शेखपुरा जिले के बरबीघा प्रखंड के शेरपर गांव के तालाब में हर साल पहुंच रहे है। नवंबर महीने में पहुंचे ये पंछी फरवरी महीने तक यहां प्रवास कर रहे हैं।

पंछियों के आने का यह सिलसिला एक दशक से जारी है। तीन दशक पहले भी पंछी यहां आते थे परंतु शिकार होने की वजह से आना बंद कर दिया था। अब गांव के श्रवण सिंह ने यहां शिकार करने वालों को मना कर दिया है। इस वजह से फिर से साइबेरिया से चलकर पंछी शेरपर गांव के तालाब में आने लगे हैं।

 

इसको लेकर श्रवण सिंह, धर्मेंद्र कुमार कहते हैं कि गांव में बड़ा तालाब है जिसमें तीन दशक पहले साइबेरिया से पंछी आते थे। बीच में दूर-दूर से लोग शिकार करने के लिए आने लगे । इस वजह से पंछियों ने आना बंद कर दिया ।

गांव के लोगों ने जब इसे समझा तो शिकार करने वालों को भगा दिया। अब पंछियों के लिए यह सुरक्षित तालाब बन गया। पिछले 5 सालों से साइबेरिया बत्तख इस तालाब में आ रहे हैं । 

 

 सामाजिक कार्यकर्ता और पंछी विशेषज्ञ नीमी गांव निवासी जनार्दन सिंह कहते हैं कि वन विभाग इस पर संज्ञान नहीं ले रही है। ये प्रवासी पंछी हैं। इसकी सुरक्षा का ध्यान भी हम लोग रखेंगे। इनका शिकार करना कानूनन जुर्म है। इस तरह की सूचना मिलने पर वन विभाग के द्वारा कानूनी कार्यवाई की जाएगी।

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कृषि विशेषज्ञ शांति भूषण कहते है कि साइबेरिया के इस बत्तख को आईयूसीएन (प्राकृतिक संरक्षण अंतर्राष्ट्रीय संघ) के द्वारा खतरनाक की श्रेणी में रखा गया है। इसे विलुप्त होने से बचाने के लिए प्रयास किया जा रहा है । ये बत्तख गोताखोर पंछी होते हैं। जो जल में रहने वाले कीड़े और छोटी मछली को अपना शिकार बनाते हैं। रात्रि में ही ये शिकार करते हैं। इनका प्रजनन मंगोलिया इत्यादि में होते हैं। गर्मी के दिनों में 5000 किलोमीटर दूर , साइबेरिया से चलकर ये भारत के विभिन्न हिस्सों में प्रवास करते हैं।

 

उधर, साइबेरिया के इन पंछियों की वजह से शेरपर गांव का वातावरण पंछियों के कलरव से गुंजायमान रहता है। ग्रामीण धर्मराज कहते हैं कि पंछी शाम में झुंड के झुंड गांव के आसमान में उड़ते हैं । अपने करतब और कलरव से वातावरण को रमणीय बना देते हैं।

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