
महतो बाबा के आदेश पर चलने लगी थी दीवार, दो दिवसीय लगा राजकीय मेला

महतो बाबा के आदेश पर चलने लगी थी दीवार, दो दिवसीय लगा राजकीय मेला
नालंदा
नालंदा जिले के सरमेरा प्रखंड अंतर्गत परनावां गांव में दो दिवसीय राजकीय मेला का समापन गुरुवार को हो गया । महतो बाबा राजकीय मेला का आयोजन 2018 से किया जा रहा है।
इस मेल में भारी संख्या में श्रद्धालु जुटे और पूजा अर्चना की। मेला में बड़े-बड़े झूले लगाए गए। भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति से ग्रामीणों में भी खुशी रही।
बताया जाता है कि बाबा ने यहां जीवित रूप से समाधि ली थी। इस समाधि स्थल पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। यहां के के यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष ई रवि चौधरी, ई अमित कुमार के द्वारा सभी भक्तों के लिए वृहत रूप से भंडारा का भी आयोजन किया गया था।
आयोजन समिति के अध्यक्ष केदार महतो ने बताया कि 2 साल पर यहां राजकीय मेला का आयोजन किया जाता है।
इंजीनियर रवि चौधरी ने कहा कि बाबा श्री शरण निवास बाबा मखदूम बाबा के मित्र थे।

वे हिंदू मुस्लिम एकता के प्रतीक हैं और उनकी समाधि स्थल उनके पैतृक गांव में है। जहां मेला लगता है। उनके द्वारा भी श्रद्धालुओं की सेवा की गई।
इंजीनियर अमित कुमार ने बताया कि बाबा श्री शरण निवास महतो बाबा के इस राजकीय मेला में वह भी उपस्थित हुए और श्रद्धालुओं की सेवा की । भव्य भंडारा का भी आयोजन किया।
दीवार को चलने का बाबा ने दिया आदेश
मान्यता है कि 800 साल पहले इसी गांव में महतो बाबा ने घोर तपस्या की और उनको दिव्य शक्ति प्राप्त हुई । बताया जाता है कि बिहार शरीफ के मखदूम बाबा और महतो बाबा घनिष्ठ मित्र थे। मान्यता है कि एक बार गांव में महतो बाबा सूत काट रहे थे । इसी दौरान एक भक्त ने कहा कि मखदूम बाबा शेरपर चढ़कर मिलने आ रहे हैं । यह सुनते ही महतो बाबा ने मित्र से मिलने के लिए जिस दीवार पर बैठे थे उस दीवार को ही चलने का आदेश दिया और वह दीवार चलने लगी।
मान्यता है कि 800 साल पहले यहां जंगल था । जहां बाबा ने तपस्या की थी। यह भी कहा जाता है कि उनके पिता का नाम भूदेव महतो और माता का नाम वसुंधरा देवी था। वैशाख पूर्णिमा के दिन यहां 2 वर्ष पर एक बार राजकीय मेला का आयोजन होता है।




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