• Monday, 01 September 2025
कंगना को महिला जवान द्वारा थप्पड़ मारने की प्रशंसा का करारा जवाब पढ़िए

कंगना को महिला जवान द्वारा थप्पड़ मारने की प्रशंसा का करारा जवाब पढ़िए

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कंगना को महिला जवान द्वारा थप्पड़ मारने की प्रशंसा का करारा जवाब पढ़िए

 

 

 

जितेंद्र कुमार (आलेख लेखक के फेसबुक से साभार)

 

आज नवनिर्वाचित सांसद महोदया के गालों पर पड़े थप्पड़ पर आप जरूर खुश हो सकते हैं,लेकिन इस थप्पड़ की गूंज पंजाब हरियाणा की कर्मठ और मेहनती महिलाओं के कानों में,उनके चूल्हे चौकों में, बथानो में..कई सालों तक सुनाई पड़ती रहेगी..। सीआईएसएफ की सिरफिरी महिला सुरक्षा कर्मी ने जो किया है,उसका पंजाब हरियाणा की स्त्रियों को भारी नुकसान होना तय है…बहुत भारी नुकसान..

 

आप ने फौज से जुड़ी हिंदी फिल्में देखी होंगी, फिल्मों की पूरी भाषा पंजाबी होती थी,हर किरदार में,हर सीन में देशभक्त सरदार ही सरदार होते थे।फिर अस्सी के दौर में इंदिरा जी की अंगरक्षकों के द्वारा हत्या और कुछ एक सिख पलटुनों की बगावत के बाद सब बदल गया।सुरक्षा की समीक्षा हुई,फौज में सबकी भागीदारी तय की गई,आज अपने आस पास के कैंटोनमेंट पे नज़र डाल लीजिए,गिने चुने ही सिख मिलेंगे।बहादुरी से बड़ी चीज प्रतिबद्धता होती है,राष्ट्र प्रेम होता है..और इसपर कोई देश, कोई फ़ौज,कोई सुरक्षा संस्थान कभी समझौता नहीं कर सकता।

 

राजीव गांधी जी को श्रीलंकाई तमिल सिपाही द्वारा कुंदा मारने के बाद ही तय हो गया था कि लिबरेशन टाइगर की पूंछ कटने वाली है।उनकी हत्या के दिन ये तय हो गया था कि प्रभाकरण अपने आत्मघाती दस्ते सहित कुत्ते की मौत मारा जायेगा और कोई बचाने नहीं आएगा।वही हुआ भी और मित्रों ने ही जश्न भी मनाया..

 

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जब सुरक्षा बलों में महिलाओं की भर्ती शुरू हुई, कद काठी से मजबूत,भाषा से दबंग,बहुत ही मेहनती और कर्मठ पंजाब हरियाणा की महिलाएं सुरक्षा बलों में शामिल हुई हैं।इनके यहां बड़ी संख्या में पुरुष दारू,बीड़ी और हसीस में उलझे हैं।महिलाओं की कर्मठता का कोई जवाब नही है।घर का बाहर का सारा काम देखती हैं...

 

इस सिरफिरी महिला सिपाही ने घृणास्पद काम किया है,अपनी पूरी कौम को बदनाम किया है।सीआईएसएफ एयरपोर्ट की सिक्योरिटी करती है।आज एयरपोर्ट सिक्योरिटी सबसे चुनौतीपूर्ण काम है।अब सुरक्षा कर्मियों का फिर से बैकग्राउंड वेरिफिकेशन करना ही पड़ेगा।टुच्चे लोग,किसानों से जोड़कर इस मूर्ख थप्पड़बाजिन को हीरोइन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।ऐसे में संख्या समीक्षा भी करनी ही होगी।प्रतिबद्धता के आधार पर झारखंड,नॉर्थ ईस्ट कर्नाटक आदि क्षेत्रों की कर्मठ महिलाओं को जगह दी जा सकती है।आज के ऑटोमैटिक हथियारों के युग में सुरक्षा बलों में कद काठी से ज्यादा हौसला और देश के प्रति श्रद्धा ज्यादा महत्वपूर्ण है…बहुत ज्यादा।

 

अपराधी को अपराधी रहने दीजिए।किसानों से जोड़कर हीरोइन बना के किसानों की साहसी और समर्पित बेटियों का भविष्य मत छीनिए।भ्रूण हत्याओं के लिए कुखायत क्षेत्र से बड़ी मुश्किल से तो ये इन्होंने जीवन पाया है...

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