• Monday, 01 September 2025
माटर साहब के लिए बनडमरु बाबा का मंत्र और उपर उपर पीने वाले

माटर साहब के लिए बनडमरु बाबा का मंत्र और उपर उपर पीने वाले

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माटर साहब के लिए बनडमरु बाबा का मंत्र और उपर उपर पीने वाले 

 

(अरुण साथी की व्यंग रचना )

 

डिस्कलेमर- इसका किसी नेता, अधिकारी, कर्मचारी से कोई संबंध नहीं है। दिल पर हल्का हल्का लें।

 

आज एक मित्र उस समाचार से दुखी थे जिसमें एक वरीय पत्रकार ने लिखा कि बिहार के सर्वोच्च पदधारी महोदय ने बाबा से अनुरोध किया। अनुरोध शब्द से वे आहत थे। मैंने उनको समझाया। बिहार में जो हो रहा है, उस स्थिति को देखते हुए पत्रकार मित्र ने सही शब्द का प्रयोग किया है। 

 

अब देखिए। गांव देहात में जब कोई सनक जाता है तो उसके लिए, एक ढकनी निकलल है हो, कहा जाता है।अब चूंकी बाबा भी एक ढकनी निकलल है, तो उनके लिए सर्वोच्च बेचारे क्या निर्देश देंगें। जिसको मुंह उपर करके थूकने की आदत हो उसके दूर से ही निकल जाना श्रेस्कर होता है। 

 

अब सोंचिए, बाबा बिहार में सर्वोच्च है की नहीं। पिछला राज दरबार बाबा के नाम कुर्बान रहा। हंंगामा हुआ। जुत्तम, जुत्ती हुआ।

 

हमारे राजा ने भरी सभा में कहा, "मैं हूं न।"

 

 बाबा बोले, "नहीं। मैं हूं।" 

 

अच्छा, यह बात बिल्कुल झूठ है कि बाबा का हृदय टाटा स्टील से बना है। 

कहिए कैसे। 

अभी गुरुजी ने समय परिवर्तन की मांग की। सत्ता पक्ष के नेता भी चोंगाधारी को बुला कर खूब गरजे। 

यह सब नहीं चलेगा। 

बाबा ने सहृदयता दिखाई। समय परिवर्तन किया। पन्द्रह मिनट पहले कर दिया। 

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बाबा से पूछ ही लिया। 

 

"बाबा, आप एतना बनडमरु काहे है।" 

 

बाबा ने समझाया। 

 

"मैंने बहुत पहले ही सीख लिया है। काम करने वाले मजदूर को शू शू करने का भी मौका नहीं दो। खैनी कैसे खा लेगा। एक दम पाई-पाई बसूल करना है। इ मास्टर सब से भी वही कर रहे। पैसा देते हैं, तो बसूल करेगें ही। पाई-पाई।और यह सब मास्टर के हित में ही है। चार बजे सुबह उठने की आदत इसी बहाने लग जाएगी। सुबह में मार्निंग वाक भी निशुल्क। खाना-बाना क्यों खाना है। एक माह दिन में खाना नहीं खाएगें तो सभी का रोजा हो जाएगा। सेहत सुधर जाएगा। मास्टरों के सेहत का ख्याल करके ही यह सब किया गया। सबको डायबटिज है। सब ठीक होगा। "

 

पूछा, 

"बाबा, पता हैं न जिस संस्था को आपने जांच करने का जिम्मा दिया है। वह संस्था बेरोजगार युवक को बहाल करने में तीन-तीन लाख बसूल रहा। अब वह बेचारा मास्टर सब से बसूल कर रहा। और बेंच से लेकर पोशाक तक, सब ऊपर से ही दिया जाएगा।"

  

बाबा बोले, 

"इसमें कौन सी नई बात है। नहीं सुना है। ऊपर ऊपर पी जाते है, जो पीने वाले होते है। जय बिहार.."

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