BPSC 70वीं : 12 साल से घर गृहस्थी संभाल रही रुचि को ऐसे मिली सफलता
BPSC 70वीं : 12 साल से घर गृहस्थी संभाल रही रुचि को ऐसे मिली सफलता
सरमेरा, नालंदा
"सिर्फ पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है.."
"कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो...!"
दशरथ मांझी का डायलॉग, "जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं...!"
उपर्युक्त पंक्तियों को चरितार्थ करके दिखाया है नालंदा जिला के सरमेरा निवासी रुचि रानी ने । रुचि को बीपीएससी की परीक्षा में सफलता मिली है। रुचि का पैतृक घर पटना का बख्तियारपुर है। रुचि के भाई आलोक अभिजीत को भी यह सफलता मिली है। रुचि कुमार को जहां एसडीएम का रैंक मिला है, वही आलोक अभिजीत को वेलफेयर ऑफिसर का पद मिला है।
रुचि ने यह सफलता घर संभालते हुए, बच्चों का परवरिश करते हुए और एक छोटे बच्चों के दिल में प्रॉब्लम होने के बाद दिल्ली में उसका इलाज करते हुए तथा नियोजन पर प्रखंड में नौकरी करते हुए प्राप्त की है। रुचि रानी की इस सफलता से सभी को प्रेरणा मिल रही है।
12 साल पहले उसकी शादी नालंदा से सरमेरा निवासी प्रभाकर भारद्वाज से हुए। पति निजी कंपनी में जॉब करते है।
उसके बाद रुचि रानी को दो बच्चे हुए एक 8 साल का, एक 5 साल का है। फिर भी रुचि ने बीपीएससी कंप्लीट करने का अपना सपना नहीं छोड़ा और नियमित रूप से धीरे-धीरे पढ़ाई करती रही।
रुचि कुमारी ने बताया कि इसकी प्रारंभिक पढ़ाई बख्तियारपुर के सरस्वती शिशु मंदिर से हुई। उसके बाद दशमी तक की पढ़ाई खुसरूपुर के सरस्वती शिशु मंदिर हुए।
फिर बख्तियारपुर के ही राम लखन सिंह यादव कॉलेज से स्नातक किया।
उसके बाद घर संभालते हुए 12 साल के बाद यह सफलता प्राप्त की।
खुशी के साहस को इस बात से समझा जा सकता है कि जब परीक्षा परिणाम आया है तो अपने बच्चों के इलाज के लिए दिल्ली के एम्स में है और अभी 5 दिनों तक वहीं रहेगी।
रुचि ने बताया कि घर गृहस्ती संभालते हुए बच्चों को स्कूल भेजने के बाद जो खाली समय बचता था उसमें वह पढ़ाई करती थी। उसकी ज्यादातर पढ़ाई ऑनलाइन मोबाइल के माध्यम से ही हुआ है।
रुचि ने बताया कि इंटरव्यू की तैयारी भी उसने घर पर रहकर ही किया है केवल मौक इंटरव्यू के लिए पटना जाना हुआ।
उसने बताया कि उसकी मम्मी यह परीक्षा पास करना चाहती थी परंतु वह कामयाब नहीं हो सकी। मम्मी का सपना उसने सरकार किया है। इसको लेकर लखीसराय एसबीआई बैंक के प्रबंधक मनोज कुमार ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी बहू को यह सफलता
परिश्रम के दम पर मिला है।
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