• Friday, 09 December 2022
पढ़िए, एक बाप ने नोन-रोटी खाकर बेटी को पढ़ाया फिर बेटी ने कैसे सफलता का परचम लहराया

पढ़िए, एक बाप ने नोन-रोटी खाकर बेटी को पढ़ाया फिर बेटी ने कैसे सफलता का परचम लहराया

पढ़िए, एक बाप ने नोन-रोटी खाकर बेटी को पढ़ाया फिर बेटी ने कैसे सफलता का परचम लहराया


शेखपुरा
 
बिहार के शेखपुरा जिले में एक बेटी ने जब माता-पिता के अभाव और गरीबी के बीच में पढ़ाने के संकल्प और तपस्या को आत्मसात किया तो फिर बेटी के संघर्ष और परिश्रम ने सफलता की बुलंदी पर उसे पहुंचा दिया। बेटी प्रीतम ने अपने गरीब माता-पिता के अरमानों को पूरा किया और संघर्ष करते हुए शादी के 13 साल के बाद बच्चे और परिवार को संभाल सहायक प्रोफ़ेसर भूगोल विषय से परीक्षा में सफलता प्राप्त कर यूजीसी नेट में सफल हुई। यह बेटी  शेखपुरा जिले के चेवाड़ा प्रखंड अंतर्गत लोहान पंचायत के भुसरी गांव निवासी रविंद्र यादव और उनकी पत्नी आंगनबाड़ी सेविका सुशीला कुमारी की बेटी प्रीतम कुमारी है।
 अपनी मां के साथ प्रितम कुमारी दायें से दूसरी साथ में पिता और भाई बहन 
 
 
प्रीतम कुमारी बताती हैं कि उसके गांव में आज ही मिडिल स्कूल नहीं है। बगल के गांव में परेशानी थी। पिता और माता की प्रेरणा से वह अपने नानी घर नवादा जिले के मिर्जापुर पढ़ने के लिए चली गई और वहां से प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय से मैट्रिक परीक्षा में सफलता प्राप्त की। वहां से फिर पकरीबरामा के धेवधा से स्नातक की डिग्री ली और पटना यूनिवर्सिटी से दरभंगा हाउस से भुगेल में पीजी किया और फिर इसी बीच B.ed और  एमएड की।  इन सभी विषयों में सफलता प्राप्त करते हुए जमुई में सहायक शिक्षिका भी बनी।
 
2009 में प्रीतम की शादी जमुई जिला के अलीगंज थाना क्षेत्र के हिलसा   फुलवरिया गांव में हुई। प्रीतम के पति रवीश कुमार जमुई जिला के ही निवासी हैं। फिलहाल बिहार पुलिस में कार्यरत हैं और पुलिस मुख्यालय पटेल भवन में काम कर रहे हैं।  शिक्षिका के पद पर वहां काम करते हुए अपने अध्ययन को जारी रखा। ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखी और यूजीसी नेट की परीक्षा में सफलता प्राप्त की भूगोल विषय से प्रीतम को यह सफलता मिली है।
 
अपनी यादों को साझा करते हुए प्रीतम बताती हैं कि उनकी मां और पिता दोनों अपने समय के स्नातक हैं।  वह  छह बहन और एक भाई में सबसे बड़ी है । उसके कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी थी । माता-पिता ने बड़ी उम्मीद से पढ़ाया और फिर वह लगातार संघर्ष करती रही।
 
पिता रविंद्र यादव से बात करने पर उन्होंने साफ कहा कि 6 बेटी के पिता है तो काफी संघर्ष करना पड़ा। कोई बाहरी आमदनी नहीं थी। किसान को क्या आमदनी होती है इसे आप समझ सकते हैं। इस बीच पढ़ाई के महत्व को वह जान रहे थे। इसीलिए अपनी बेटी को पढ़ाने में कहीं कोई कमी नहीं की। सभी बेटियों को उन्होंने पढ़ाया है। बड़ी बेटी ने माता पिता और क्षेत्र का मान बढ़ाया है। वह कहते हैं कि नोन रोटी खाकर भी उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ाया है। सभी को ऐसा करना चाहिए। बता दें कि शादी के बाद प्रीतम एक बच्चे की मां भी है।  इसी बीच संघर्ष करते हुए उसने सफलता के इस मुकाम को हासिल किया है। ऐसे में प्रीतम उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं जो संघर्ष कर रही है।

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