• Saturday, 03 December 2022
बिहार में गजब खेला : स्प्लेंडर बाइक को सरकारी बाबू ने बना दिया टाटा कंपनी का बस

बिहार में गजब खेला : स्प्लेंडर बाइक को सरकारी बाबू ने बना दिया टाटा कंपनी का बस

बिहार में गजब खेला : स्प्लेंडर बाइक को सरकारी बाबू ने बना दिया टाटा कंपनी का बस


 
 
 
 
 
 
शेखपुरा
 
अजब बिहार की गजब कहानी यहां आप देखेंगे। वैसे तो बिहार में सरकारी बाबुओं के द्वारा अलग-अलग तरह के खेला किया ही जाता रहा है परंतु एक खेला बिहार के शेखपुरा जिला में भी सरकारी बाबुओं ने कर दिया है। इसे सरकारी बाबू के द्वारा किया जाने वाला काला जादू भी आपका सकते हैं। काला जादू इस मायने में कि सरकारी बाबू ने बिहार में एक युवक के स्प्लेंडर बाइक को अपने काला जादू से टाटा कंपनी के बस में बदल दिया। अब वह युवक अपने टाटा कंपनी के बस को फिर से स्प्लेंडर बाइक बनाने के लिए सरकारी बाबू का गोर पूजी कर रहा है परंतु सरकारी बाबू तो सरकारी बाबू है। डेढ़ साल से उनका काला जादू चला हुआ है और युवक परेशान है।
दरअसल, यह पूरा मामला शेखपुरा जिले के अरियरी प्रखंड के डीहा गांव निवासी चंदन कुमार से जुड़ा हुआ है। चंदन कुमार ने 2010 में स्थानीय हीरो एजेंसी से स्प्लेंडर बाइक खरीदी। उसका रजिस्ट्रेशन कराने के लिए जिला परिवहन कार्यालय में दे दिया। फिर रजिस्ट्रेशन नंबर भी जारी कर दिया गया। BR 52- 9484 । कई साल तक स्प्लेंडर बाइक युवक चलाता रहा। फिर 1 दिन प्रदूषण जांच कराने के लिए युवक  प्रदूषण जांच केंद्र पर गया तो प्रदूषण जांच करने वालों ने बताया कि आप बस लेकर प्रदूषण कराने के लिए आ गए हैं । जबकि दिखने में यह स्प्लेंडर बाइक जैसा लगता है।

देखने में स्प्लेंडर बाइक और है यह बस

 
युवक भी चौंक गया। चुकी वह स्प्लेंडर ही था । युवक ने प्रदूषण संचालक से बहस कर दी। फिर प्रदूषण केंद्र के संचालक ने बताया कि आपका जो नंबर है BR 52- 9484  यह बस का नंबर दिखा रहा है। फिर इसका प्रदूषण सर्टिफिकेट कैसे जारी किया जा सकता है। जबकि मैं देख रहा हूं कि यह स्प्लेंडर बाइक है। युवक परेशान हो गया। फिर वह इस मामले में छानबीन करने लगा तो पता चला कि BR 52- 9484  बस का रजिस्ट्रेशन है। वह भी झारखंड के गोड्डा जिला में रजिस्ट्रेशन दिखा रहा है जबकि BR 52-  शेखपुरा जिला का  नंबर है। गोड्डा जिला के राजीव सिन्हा के नाम से टाटा कंपनी का बस निबंधन में  चढ़ा हुआ है। परेशान युवक   जिला परिवहन विभाग में लिखित रूप से आवेदन देकर सारी बात बताई।
सरकारी बाबू और अधिकारी किसी तरह का संज्ञान नहीं लिया । बड़ा बाबू जिला परिवहन पदाधिकारी के बड़ा बाबू होते हैं । उनकी ख्याति दूर-दूर तक है। परिवहन विभाग से संबंध रखने वाला हर कोई बड़ा बाबू के कक्ष में ही नजर आता है। जिला परिवहन पदाधिकारी तो कभी दिखते नहीं, सो युवक बड़ा बाबू के चक्कर लगाने लगा। बड़ा बाबू कभी आज आइए तो   कभी कल आइए करते हुए डेढ़ साल बिता दिया। अब तक इस स्प्लेंडर बाइक को जो बस में बदल गया था फिर से बाइक में नहीं बदला गया है। डर के मारे युवक बाइक चल रहा है। कभी पकड़ा गया तो जुर्माना बस का लगेगा कि स्प्लेंडर का, यह असमंजस की स्थिति है । बाइक का बीमा भी बस का चुकाना होगा। यह अलग परेशानी है।
 
प्रदूषण का सर्टिफिकेट भी नहीं बना है। इस संबंध में जिला परिवहन पदाधिकारी विमल कुमार सिंह के मोबाइल नंबर पर लगातार संपर्क किए जाने के बाद भी उनके द्वारा मोबाइल रिसीव नहीं किया गया । जिस वजह से सरकारी पक्ष में नहीं आया है। बता दें कि  जिला में कई महीनों से स्थाई जिला परिवहन पदाधिकारी नहीं है। इस वजह से भी भारी परेशानी हो रही है।

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