• Tuesday, 06 December 2022
सड़कों पर मरते लोगों को बचाने में कैसे जिला प्रशासन नहीं है सक्रिय:  रिपोर्ट

सड़कों पर मरते लोगों को बचाने में कैसे जिला प्रशासन नहीं है सक्रिय: रिपोर्ट

सड़कों पर मरते लोगों को बचाने में कैसे जिला प्रशासन नहीं है सक्रिय:  रिपोर्ट

 

न्यूज़डेस्क, पटना 

 

देशभर में प्रत्येक वर्ष डेढ़ लाख लोगों की मौत सड़क हादसे में हो जाती है। इनमें ज्यादातर किशोर और युवा होते हैं । ऐसे सड़क हादसों में लगभग 60% सड़क हादसे ग्रामीण सड़कों पर हो रही है । ग्रामीण सड़कों की व्यवस्था सुधारने से भी यह हो रहा है। वही सड़क दुर्घटना के 1 घंटा के समय को गोल्डन आवर कहा जाता है।

 

 रिसर्च में चिकित्सकों ने माना है कि इस 1 घंटा के अंदर अंदर यदि दुर्घटना में घायल को अस्पताल में चिकित्सक सुविधा मिल जाए तो उसकी जान बच सकती है परंतु चिकित्सक की सुविधा लोगों को मिले इसके लिए बिहार के कई जिलों के जिला प्रशासन की लापरवाही खुलकर सामने आ गई।

 इस लापरवाही की वजह से दुर्घटना के शिकार 90% लोग मौत के गाल में समा जाते हैं। शोध में यह भी बात सामने आया है कि गोल्डन आवर में 90% लोग को अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता जिसकी वजह से उनकी मौत हो जाती है। दरअसल यह पूरा मामला जिला प्रशासन की लापरवाही को इस रूप में रेखांकित करता है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार के द्वारा दुर्घटना के शिकार लोगों को अस्पताल पहुंचाने पर उनको पुरस्कृत करने की योजना है।

 

 इसके लिए एक राशि भी निर्धारित की गई है और ₹5000 तक का पुरस्कार भी दिया जाना है। इतना ही नहीं इसके लिए पुलिस के द्वारा किसी प्रकार की पूछताछ भी नहीं होनी है । मतलब यह कि यदि कोई आदमी किसी मरते हुए आदमी को सड़क से उठाकर अस्पताल पहुंचाता है तो उसे ₹5000 का पुरस्कार मिलेगा और पुलिस उससे किसी प्रकार की पूछताछ नहीं करेगी। जिला में इस तरह की व्यवस्था होने पर जिला प्रशासन की खामोशी से यह नहीं हो पा रहा है और कई जिले में इसका आंकड़ा शून्य है।

 

गुड सेमेरिटन को किया जाता है सम्मानित

 

 बिहार में वित्तीय वर्ष 2022 : 23 में 44 गुड सेमेरिटन को चुना गया और उन को पुरस्कृत किया गया। सबसे अधिक गुड सेमेरिटन की संख्या सहरसा जिले में है और यहां के जिला प्रशासन ने 10 लोगों को इसके लिए पुरस्कृत किया। गुड सेमेरिटन ऐसे व्यक्ति को कहा जाता है जो दुर्घटना में घायल को अस्पताल पहुंचाते हैं। सहरसा जिला इसमें अव्वल रहा है।

 

इसी तरह से गुड सेमेरिटन कैमूर, वैशाली और बांका जिला का भी नाम शामिल है यहां 6: 6 लोगों को इस तरह से पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया।

 

मुजफ्फरपुर, खगड़िया जिला प्रशासन ने भी इसमें बेहतर काम किया और पांच–पांच लोगों को दुर्घटना के शिकार के मदद करने के लिए पुरस्कृत किया।

 

भोजपुर, पूर्णिया और नालंदा जिला में भी इस पर काम किया गया और दुर्घटना में शिकार को मदद करने के लिए  चार चार लोगों को पुरस्कृत किया।

 

 

इन जिलों ने किया फिसड्डी काम, किसी को नहीं दिया इनाम

 

बिहार में एक दर्जन से अधिक जिलों ने इसमें फिसड्डी काम किया है और दुर्घटना में घायल को अस्पताल पहुंचाने वालों को प्रेरित करने लोगों को जागरूक करने में किसी को पुरस्कृत नहीं किया। जिला में शेखपुरा शिवहर, सीतामढ़ी, गया, औरंगाबाद, सारण,  गोपालगंज, मुंगेर, बक्सर, मधुबनी इत्यादि जिला शामिल है।

 

राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह खड़े ट्रक जानलेवा। कहीं प्रशासन इस पर ध्यान नहीं देती। यह तस्वीर शेखपुरा जिला मुख्यालय की है

 

Share News with your Friends

Comment / Reply From

You May Also Like

Stay Connected

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!